150 CCTV कैमरे खंगाले, 300 संदिग्धों से पूछताछ लेकिन नहीं मिल रहा था क्लू, एक कॉन्स्टेबल के स्मार्ट शक ने पलभर में सॉल्व कर दिया डबल मर्डर का केस

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सतर्कता कांस्टेबल शिवराज की, पकड़ा गया हत्यारा
सतर्कता कांस्टेबल शिवराज की, पकड़ा गया हत्यारा

कोटा (राजस्थान). ज्वैलर राजेंद्र विजयवर्गीय की पत्नी गायत्री व बेटी पलक के दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर लाखों रुपए की नकदी व जेवरात लूट की वारदात का पुलिस ने सोमवार को पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें मास्टरमाइंड व मुख्य आरोपी पुराना घरेलू नौकर निकला। हत्याकांड में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि बदमाशों ने घर से करीब एक करोड़ की नकदी व जेवरात की लूट की थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से लूटे गए 37 लाख में से 21.70 लाख रुपए, 2 किलो 26 ग्राम सोना, साढ़े 13 किलोग्राम चांदी के जेवर बरामद कर लिए।

आईजी बिपिन कुमार पांडे ने बताया कि मुख्य आरोपी मस्तराम उर्फ सल्लू मीणा (28) और लोकेश मीणा (20) को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपी मस्तराम ने डेढ़ साल पहले राजेंद्र विजय के यहां दुकान पर करीब ढाई महीने चौकीदारी की थी। इस दौरान मस्तराम का ज्वैलर के घर भी आना-जाना था। इसलिए घरवालों की दिनचर्या समेत पूरी जानकारी थी। मस्तराम ने रातों-रात धनवान बनने की चाहत में राजेंद्र को लूटने की योजना बनाई। उसने राजेंद्र के घर व दुकान की रैकी की थी।

पुलिस ने सोमवार दोपहर को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 9 फरवरी तक रिमांड पर भेजा गया। कातिलों ने वारदात को अंजाम कैसे दिया, कहां दिया, कब दिया, क्यों दिया? और वारदात के बाद पुलिस ने क्या किया? बदमाश कहां-कैसे भागे? उन्हें पुलिस ने कैसे गिरफ्तार किया..? पढ़िए, मां-बेटी के दोहरे हत्याकांड से जुड़े तमाम सवालों के जवाब विशेष रिपोर्ट में…

कब-कैसे हुई वारदात: दुकान की रैकी कर घर पहुंचे, चांदमल के निकलते ही की वारदात

एसपी दीपक भार्गव ने बताया कि 31 जनवरी को मस्तराम और लोकेश दोनों लोहे के सरिए लेकर ज्वैलर राजेंद्र विजय की दुकान पर पहुंचे। वहां दोनों ने दुकान की पूरी रैकी की और उन्हें राजेंद्र दुकान पर बैठा नजर आया। इसके बाद दोनों बदमाश राजेंद्र के घर पहुंच गए। वहां उन्होंने राजेंद्र विजय के पिता चांदमल के घर से बाहर जाने का इंतजार किया। मस्तराम जानता था कि ज्वैलर राजेंद्र विजय रोज करीब 9 बजे तक घर पहुंचते हैं। वहीं, राजेंद्र के पिता चांदमल शाम करीब 8 बजे घर से मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। चांदमल के घर से निकलते ही दोनों ज्वैलर राजेंद्र विजय के घर में घुस गए और दोनों की हत्या कर दी।

कहां काटी फरारी : बाइक से बूंदी, बस से जयपुर पहुंचे, खरीदे महंगे मोबाइल-कपड़े

एएसपी राजेश मील ने बताया कि मस्तराम ने करीब 3 माह चौकीदार की नौकरी की और मर्जी से छोड़कर चला गया। दोनों का पहले से क्राइम रिकॉर्ड भी रहा है। दोनों 31 जनवरी को बाइक से राजेंद्र के घर पहुंचे और वारदात के बाद बूंदी गांव गए, जहां गहने व रुपए छुपाए। फिर 31 जनवरी की रात को ही बूंदी बस स्टैंड गए और रोडवेज बस से जयपुर चले गए। जयपुर बस स्टैंड के पास एक होटल में रुके और अगले दिन जमकर खरीदारी की और शराब पी। दोनों ने महंगे मोबाइल, कपड़े व अन्य सामान खरीदे। 2 फरवरी को वो वापस कोटा आ गए। कोटा आकर दोनों आरोपियों ने जमकर शराब पी और अय्याशी में पैसों को उड़ाना शुरू कर दिया।

क्या गलती की मस्तराम ने : शक न हो इसलिए शोक जताने पहुंचा, ये हरकत महंगी पड़ी

मस्तराम दो-दो हत्या करने के बाद भी बेफिक्र था। पुलिस व परिजनों को उस पर शक न हो इसलिए वो पीड़ित परिवार के पास शोक व्यक्त करने भी गया। पुलिस दल हर जगह चौकस था और उन्हें उसका वहां आना खटका। कांस्टेबल शिवराज को उसके हाव-भाव, हाथ पर खरोंच के निशान से उस पर शक हुआ। क्योंकि मां-बेटी ने हत्यारों से जमकर संघर्ष किया था। इसके बाद पुलिस ने उस पर निगाह रखी तो शक पुख्ता हो गया। पुलिस ने उसे स्टेशन इलाके से हिरासत में ले लिया और जब कड़ी पूछताछ की तो वो टूट गया। मस्तराम ने खुद ही सारा गुनाह कबूल कर लिया, बाद में पुलिस ने दूसरे साथी को भी गिरफ्तार कर लिया।

क्यों की हत्या : लूट के लिए, हत्या की प्लानिंग थी क्योंकि सरिए साथ ले गए थे

दोनों ने सिर्फ लूट के लिए हत्या की। पुलिस के अनुसार- वो पहले से हत्या का मन बना चुके थे, इसीलिए दोनों सरिए साथ ले गए थे। घर में राजेंद्र की पत्नी गायत्री और बेटी पलक थी। गायत्री ने मस्तराम को पुराना नौकर समझकर उसे बैठने को कहा और मस्तराम ने बिना मौका दिए उस पर सरिए से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। आवाज सुनकर दूसरे कमरे से बेटी पलक बाहर आई तो उसे भी सरियों से वार करके मौत के घाट उतार दिया। घर के ड्राइंग रूम से दोनों लाशों को घसीटते हुए ले गए और अलग-अलग कर दिया। फिर 37 लाख रुपए नकद और करीब 74 लाख रुपए कीमत के सोने चांदी के आभूषण लूटकर भाग निकले।

कौन शामिल रहे खुलासे में : एडीजी, आईजी और एसपी सहित 200 पुलिसकर्मी शामिल रहे, चालान 15 दिन में

आईजी पांडे ने कहा कि खुलासे में भीमगंजमंडी थाने के कांस्टेबल शिवराज की सबसे अहम भूमिका है। केस सॉल्व करने के लिए सरकार ने एडीजी जंगा श्रीनिवास राव को कोटा भेजा था। एसपी भी तीनों दिन सक्रिय रहे। इस मामले को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर 15 दिन में चालान पेश किया जाएगा। पुलिस टीम में एएसपी राजेश मील, उमेश ओझा, प्रशिक्षु आईपीएस डॉ. अमृता दुहन, डीएसपी भंवर सिंह, राजेश मेश्राम, सीआई महावीर सिंह, मुनिंद्र सिंह, मदनलाल, विजयशंकर समेत 200 पुलिसकर्मी शामिल रहे। साइबर टीम, एफएसएल टीम, डॉग स्क्वायड की टीम ने भी केस को सॉल्व करने में अहम भूमिका निभाई।

प्रमोशन मिलेगा : सतर्कता कांस्टेबल शिवराज की, पकड़ा गया हत्यारा

इस केस को सुलझाने में भीमगंजमंडी थाने के कांस्टेबल शिवराज की सतर्कता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिवराज 3 सालों में 4 हत्याकांड की गुत्थी सुलझा चुके हैं। इसके अलावा कई इनामी बदमाशों को पकड़ने, पुलिस प्राथमिकताओं को पूरा करने में कई बार पुरस्कृत हो चुके हैं। यही वजह है कि शहर के पुराने अधिकारी पहले भी शिवराज को पदोन्नत करने के लिए फाइल मुख्यालय स्तर पर भेज चुके हैं।

बाय इन्विटेशन : 150 सीसीटीवी कैमरे खंगाले, 300 संदिग्धों से पूछताछ की तब खुला हत्या का राज

– एसपी सिटी दीपक भार्गव बता रहे हैं कैसे खुली वारदात। दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस के सामने सिर्फ अंधेरा था, यह पूरा केस एकदम ब्लाइंड था। हमारी चुनौती इस अंधेरे को चीरते हुए बदमाशों को पकड़ना था। पहले दिन से हमने केस में जान झोंक दी, जिसका रिजल्ट भी मिला। हत्याकांड आसानी से खुलने वाला नहीं लग रहा था इसलिए सबसे पहले 200 पुलिसकर्मियों की 7 मजबूत टीमों को केस सॉल्व करने की जिम्मेदारी दी। एक फरवरी से हमने 150 सीसीटीवी कैमरों को चिन्हित करते हुए ज्यादातर की रिकॉर्डिंग खंगालना शुरू कर दिया था। मुझे बहुत दुख हुआ जब देखा कि शहरवासियों ने कैमरे तो लगा रखे हैं, लेकिन वो एक्टिव ही नहीं हैं। किसी कैमरे की लीड निकली थी, किसी के आगे खिलौने लटके थे तो किसी में नाइट विजन नहीं है। मेरी अपील है कि सभी शहरवासी अपने कैमरों को हमेशा एक्टिव रखें।

– खैर, जो इनपुट मिले उससे आगे बढ़ते गए। राजेंद्र जी के परिचितों के अलावा हमने 300 संदिग्ध लोगों, व्यापारियों और बदमाशों से भी पूछताछ की। घरेलू नौकरों और मजदूरों की गतिविधियों को चैक किया तो हमें कुछ क्लू मिले थे। कुछ नौकर परिवार से शोक व्यक्त करने भी आए थे। हमने जब सभी की गतिविधियां, हाव-भाव चैक किए तो मस्तराम पर पुलिस टीम का संदेह गहरा गया। हत्या के दिन की उसकी गतिविधियों को क्रॉस चैक किया तो हमारा शक यकीन में बदला और उससे पूछताछ की गई। सख्त पूछताछ में वो टूट गया और उसने खुद-ब-खुद अपना जुर्म कबूल लिया।

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