12 साल में दूसरी बार होंगे सस्ते – भारत में आईफोन की कीमत कम हो सकती है, वजह – बिक्री में गिरावट आना

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भारत में आईफोन की कीमत कम हो सकती है
भारत में आईफोन की कीमत कम हो सकती है
  • 2017 में एपल ने भारत में 32 लाख आईफोन बेचे थे, 2018 में घटकर 17 लाख पहुंचा आंकड़ा
  • एपल का मार्केट शेयर भी 2018 में घटकर 1.20% रहा, 2017 में ये 2.40% था
  • एपल को दिसंबर तिमाही में आईफोन की बिक्री से 84.3 अरब डॉलर का रेवेन्यू मिला, 2017 की इसी तिमाही से 5% कम

गैजेट डेस्क. आईफोन की बिक्री में गिरावट को देखते हुए अमेरिकी टेक कंपनी एपल आईफोन की कीमतों में कमी कर सकता है। इस बात के संकेत एपल के सीईओ टिम कुक ने दिए हैं। टिम कुक ने हाल ही में जारी तिमाही के नतीजों पर चर्चा करते हुए सीधे तौर पर भारत का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका के बाहर डॉलर की मजबूती से आईफोन की बिक्री में गिरावट आई है। यही वजह है कि एपल अब आईफोन की कीमतें कम करने की तैयारी कर रही है।

अगर आईफोन की कीमतों में कमी की जाती है, तो 12 सालों में ऐसा दूसरी बार होगा। इससे पहले एपल ने 2007 में अपने पहले आईफोन की कीमतें कम की थीं। चीन में भी एपल ने आईफोन की कमजोर बिक्री को देखते हुए थर्ड पार्टी डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कीमतें कम करना शुरू कर दिया है और इसके बाद भारत में आईफोन के सस्ते होने की संभावना जताई जा रही है।

कुक ने बताई थी आईफोन की बिक्री में गिरावट की वजह
मंगलवार को तिमाही के नतीजों पर चर्चा करते समय टिम कुक ने आईफोन की बिक्री में गिरावट के कई कारण बताए थे। उन्होंने बताया था कि, अमेरिका के डॉलर की मजबूती कई देशों की करंसी से ज्यादा है, जिस वजह से आईफोन की कीमतें अमेरिका के बाहर ज्यादा हैं। इसके अलावा कुक ने इसके पीछे बैटरी रिप्लेसमेंट प्रोग्राम को भी वजह बताया। दरअसल, एपल पर कई बार आईफोन की बैटरी स्लो करने के आरोप लगे जिसके बाद कंपनी बैटरी रिप्लेसमेंट प्रोग्राम चलाया जिसके तहत 6,500 रुपए की बैटरी को सिर्फ 2,000 रुपए में बदला गया। इससे कंपनी को भी 77 हजार करोड़ का नुकसान हुआ।

भारत में आईफोन की कीमत कम हो सकती है
भारत में आईफोन की कीमत कम हो सकती है

एपल को 84.3 अरब डॉलर का रेवेन्यू मिला
एपल को दिसंबर तिमाही में 84.3 अरब डॉलर का रेवेन्यू मिला, जो 2017 की इसी तिमाही की तुलना में 5% कम है। वहीं, कंपनी को अन्य प्रोडक्ट्स से मिले रेवेन्यू में 19% की तेजी आई है। एपल के मुताबिक, 2018 की दिसंबर तिमाही में आईफोन की बिक्री से 52 अरब डॉलर का रेवेन्यू मिला, जो 2017 की दिसंबर तिमाही से 15% कम है। हालांकि, पहले ही टिम कुक ने दिसंबर तिमाही में 84 अरब डॉलर का रेवेन्यू होने का अनुमान लगाया था।

एपल के लिए भारत उभरता बाजार, टैक्स में राहत चाहती है कंपनी
एपल के सीईओ टिम कुक ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में भारत को कंपनी के लिए तेजी से उभरता हुआ बाजार बताया था। कुक ने कहा था कि, भारत उनकी कंपनी के लिए उभरता हुआ बाजार है और वह यहां की सरकार से टैक्स में राहत चाहते हैं ताकि हैंडसेट की असेंबलिंग यहीं शुरू कर सकें।

भारत में हर साल गिर रही है आईफोन की बिक्री
हॉन्गकॉन्ग की रिसर्च फर्म काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का स्मार्टफोन जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उसके मुकाबले एपल के आईफोन की बिक्री में भी कमी आ रही है। 2017 में एपल ने 32 लाख आईफोन बेचे थे, जिनकी संख्या 2018 में घटकर 17 लाख हो गई। वहीं, एपल ने 2018 में दिसंबर तिमाही में 4 लाख आईफोन भेजे जबकि वनप्लस ने इसी दौरान 5 लाख यूनिट भेजी। इस हिसाब से एपल का मार्केट शेयर 2016 में 2.30% और 2017 में 2.40% था, वहीं 2018 में सिर्फ 1.20% हो गया।

प्रीमियम सेगमेंट में सैमसंग, वनप्लस आगे, एपल का मार्केट शेयर 23%
काउंटरप्वॉइंट ने बुधवार को ही 2018 के आंकड़े जारी किए हैं जिसके मुताबिक, प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट (30 हजार रुपए से ज्यादा) में देश में सैमसंग का मार्केट शेयर सबसे ज्यादा 34% रहा, जबकि दूसरे नंबर पर 33% मार्केट शेयर के साथ वनप्लस और तीसरे नंबर पर एपल रही। एपल का मार्केट शेयर 2018 में 23% रहा जबकि अन्य कंपनियों को मार्केट शेयर भी 23% ही रहा। कई रिसर्च में एपल के मार्केट शेयर कम होने की वजह उसकी कीमतें ज्यादा होना ही बताया है।

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