बदला – अंत तक थ्रिल बनाए रखती है फिल्म, अमिताभ बच्चन के लिए देखें

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अंत तक थ्रिल बनाए रखती है फिल्म
अंत तक थ्रिल बनाए रखती है फिल्म
स्टार रेटिंग  3.5/5
स्टारकास्ट अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, अमृता सिंह, टोनी ल्यूक
डायरेक्टर सुजॉय घोष
प्रोड्यूसर रेड चिलीज एंटरटेनमेंट
जॉनर सस्पेंस-थ्रिलर

बॉलीवुड डेस्क. पिंक के बाद अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की जोड़ी बदला में साथ नजर आ रही है। यह एक थ्रिलर फिल्म है जिसमें तापसी ने एक मर्डर की आरोपी बिज़नेसवुमेन नैना सैनी की भूमिका निभाई है। वहीं, अमिताभ बच्चन एक एडवोकेट बादल गुप्ता के रोल में हैं। बदला स्पेनिश फिल्म द इनविजिबल गेस्ट की ऑफिशियल रीमेक है जिसके निर्देशक सुजॉय घोष हैं जो कि कहानी सीरीज की बेहतरीन फिल्में भी बना चुके हैं।

ऐसी है फिल्म

  1. सस्पेंस से भरी कहानी

    फिल्म की शुरुआत में नैना साहनी को बेहद परेशान दिखाया जाता है क्योंकि जिस होटल के कमरे में वह अपने लवर से मिलती है। वहां लवर अर्जुन मेहता(टोनी ल्यूक) का मर्डर हो जाता है। मर्डर का आरोप नैना पर लगता है क्योंकि उस वक्त कमरे में उसके अलावा कोई और मौजूद नहीं रहता। नैना बताती है कि मर्डर में उसका हाथ नहीं क्योंकि उसे और अर्जुन को कोई ब्लैकमेल कर रहा था और वह उसी से मिलने होटल में आए थे। दरअसल, नैना शादीशुदा और एक बच्चे की मां होती है जिसका अर्जुन से अफेयर दिखाया गया है। नैना के मुताबिक,इसी वजह से कोई उसे और अर्जुन को ब्लैकमेल कर रहा होता है। नैना का एडवोकेट गुप्ता उससे हर छोटी-छोटी जानकारी लेना चाहता है लेकिन नैना श्योर नहीं कि उस पर भरोसा किया जाए या नहीं। क्या नैना ही खूनी होती है या कोई और? इसका पता तो आपको फिल्म देखने के बाद ही चलेगा।

  2. कसा हुआ निर्देशन

    डायरेक्शन के मामले में सुजॉय घोष कहानी में परफेक्ट सस्पेंस बनाए रखने में कामयाब रहे हैं। वह अपने लीड एक्टर्स की परफॉरमेंस पर बहुत हद तक डिपेंड रहते हैं और यही उन्होंने इस फिल्म में भी किया है। बिग बी और तापसी के बीच एक घर में ही कई ऐसे दृश्य फिल्माए गए हैं जिनमें कई इमोशन दिखाए देते हैं। दोनों के बीच ख़ामोशी में भी संवाद होता है और साथ ही डायलॉग्स में शब्दों का चयन भी कमाल का है।

  3. निराश करती हैं तापसी पन्नू

    एक्टिंग की बात की जाए तो अमिताभ बच्चन ने एक तेज और चालाक एडवोकेट की बेहतरीन भूमिका निभाई है।  वह धीरे-धीरे नैना (तापसी) का विश्वास जीतते नजर आते हैं और उससे कई बातें उगलवा लेते हैं। हालांकि,तापसी किरदार की मांग के मुताबिक एक्सप्रेशन दिखाने में नाकामयाब होती दिखती हैं। उनके चेहरे पर केवल एक ही इमोशन दिखते हैं जो कि फिल्म का वीक पॉइंट भी है।लम्बे समय बाद अमृता सिंह को बड़े परदे पर देखना सुखद है। वह एक मां के किरदार में हैं जिसका बेटा खो गया है।

  4. कुल मिलाकर कहा जाए तो सुजॉय घोष ने अंत तक थ्रिल बरकरार रखा है जिससे फिल्म देखने लायक बन जाती है। साथ ही अमिताभ बच्चन की परफॉरमेंस इसे लाजवाब बना देती है।

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